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Rudra Trailer Out : अजय एक बार फिर कॉप लुक में

वेब सीरीज रुद्र द एज ऑफ डार्कनेस का ट्रेलर रिलीज(“Rudra - The Edge of Darkness"). इस वेब सीरीज से अजय देवगन (Ajay Devgn, Digital Debut) कर रहे हैं डिजिटल डेब्यू. रुद्र में अजय एक बार फिर कॉप लुक में नजर आ रहे हैं . अजय के अलावा में राशि खन्ना (Raashi Khanna), ईशा देओल (Esha Deol), अतुल कुलकर्णी, अश्विनी कालसेकर, तरुण गहलोत, आशीष विद्यार्थी और सत्यदीप मिश्रा प्रमुख भूमिकाओं में नज़र आएंगे. ‛रुद्र- द एज ऑफ डार्कनेस’ ब्रिटिश वेब सीरीज ‘लूथर’ की रीमेक है. ('Rudra - The Age of Darkness' is a remake of the British web series 'Luther'.)

राष्ट्रवाद का अन्धकार, बेगुनाह की मौत



भारत में सभी राष्ट्रवाद को महत्व दे रहे है पर यह भूल रहे है की राष्ट्रवाद सिर्फ कहने से या थोपने महत्व नहीं पा सकता. भारत के लोग अभी भी धर्म, जाती, भाषा के सहारे जीते है. लोग सिर्फ कहने के लिए भारतीय है. राष्ट्रवाद सिर्फ भारत के लिए नहीं बल्कि आज पूरी दुनिया में घातक साबित हो रहा है. दुनिया के सबसे शक्तिशाली और खुले विचारों, आधुनिकता को महत्व देनेवाले देश अमेरिका में राष्ट्रवाद के कारण एक भारतीय नागरिक की जान चली गयी. इस हमले के कारण अमेरिका के शक्ति और लोकतंत्र को धक्का लगा है. 

अमेरिका के केंसास शहर में एक पूर्व अमेरिकी नौसैनिक ने एक भारतीय इंजीनियर की गोली मारकर हत्या कर दी और एक भारतीय और एक अमेरिकी को घायल कर दिया. गोलियां चलाते समय आरोपी कथित तौर पर चिल्लाते हुए इन शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था. (1)-‘मेरे देश से निकल जाओ’ और (2) ‘आतंकवादी’. यह ‘संभवत: घृणा अपराध’ का मामला है. यह वाकया उस माहौल की एक खौफनाक झलक है जो अमेरिका के साथ पूरी दुनिया में फ़ैल रहा है. राष्ट्रवाद के इस विचार ने एक व्यक्ति की जान ली. जिस नौसैनिक ने भारतीय इंजिनियर की हत्या की उसके रवैये को एक सिरफिरे का पागलपन कह कर उससे आंख चुराना यानी सचाई से भागना है. अमेरिका में नस्लीय हिंसा की यह पहली घटना नहीं है. इस घटना को डोनाल्ड ट्रंप के रवैये से जोड़ कर देखा जा रहा है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावों से पहले राष्ट्रवाद को लेकर कई बाते कही थी. सत्ता में आने के बाद उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रों के नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिया था. डोनाल्ड को बाद में अपना फैसला वापस लेना पड़ा था किन्तु राष्ट्रवाद की आग यही नहीं रुकी. यह बढ़ रही है. अमेरिका में ट्रंप के आने के बाद नस्ली हिंसा में 115 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. 

डोनाल्ड ट्रंप का विरोध कर लोगों ने दिखाया था की आप्रवासियों को निशाना बनाए जाने के खिलाफ खुद अमेरिका के भीतर कितना विरोध है. किन्तु यह भी एक पहलु है की राष्ट्रवाद का अंधकार इतना बढ़ रहा की भारत, अमेरिका समेत पूरी दुनिया को यह अपने भीतर शामिल करने की कोशिश कर रहा है. भारत और अमेरिका में इसके उदाहरण देखने भी मिले है. भारत में राष्ट्रगीत की सख्ती, विवादित मुद्दों को उठाने पर होनेवाली हिंसा इसके उदाहरण है. अमेरिका में नस्लीय हिंसा इसके उदाहरण है.

राष्ट्रवाद की तुलना आतंकवाद से करना गलत है किन्तु अब जैसे हालात है उसके आधार पर राष्ट्रवाद की तुलना आतंकवाद से करना गलत नहीं हो सकता. आतंकवाद कट्टरता को महत्व देकर हिंसा करता है, उसी तरह राष्ट्रवाद भी हिंसा को बढ़ावा दे रहा है. सच को देखा जाए तब पता चलेगा की भारत ही नहीं पूरी दुनिया में राष्ट्रवाद को जो महत्व दिया जा रहा वह सभी को अँधेरे की तरफ ले जा रहा है. राष्ट्रवाद लोगों में दूरियों का निर्माण कर रहा है. वक़्त रहते इस राष्ट्रवाद के अंधकार से मुक्ति पानी होगी अन्यथा यह और घातक साबित होगी.
                                         



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