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Rudra Trailer Out : अजय एक बार फिर कॉप लुक में

वेब सीरीज रुद्र द एज ऑफ डार्कनेस का ट्रेलर रिलीज(“Rudra - The Edge of Darkness"). इस वेब सीरीज से अजय देवगन (Ajay Devgn, Digital Debut) कर रहे हैं डिजिटल डेब्यू. रुद्र में अजय एक बार फिर कॉप लुक में नजर आ रहे हैं . अजय के अलावा में राशि खन्ना (Raashi Khanna), ईशा देओल (Esha Deol), अतुल कुलकर्णी, अश्विनी कालसेकर, तरुण गहलोत, आशीष विद्यार्थी और सत्यदीप मिश्रा प्रमुख भूमिकाओं में नज़र आएंगे. ‛रुद्र- द एज ऑफ डार्कनेस’ ब्रिटिश वेब सीरीज ‘लूथर’ की रीमेक है. ('Rudra - The Age of Darkness' is a remake of the British web series 'Luther'.)

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद करना बेकार


राम मंदिर-बाबरी मस्जिद का मुद्दा धर्म माननेवालों लोगो के लिए हमेशा गर्व का मुद्दा रहा। इस मुद्दे को लेकर अभी भी कानूनी लड़ाई जारी है। हिन्दू लोगों कहना है की मंदिर बने वही मुस्लिम लोगों का कहना है मस्जिद बने। इस मामले में विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की राम मंदिर- बाबरी मस्जिद को आपसी बातचीत से सुलझाया जाए। अगर आपसी बातचीत सफल नहीं होती तो जरूरत पड़ने पर कोर्ट भी इस मामले में मध्यस्थता करने के लिए तैयार है।  
कोर्ट के इस फैसले का सरकार और कुछ लोगों ने समर्थन किया, तो कुछ लोगों ने विरोध किया। बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने साफ कहा है कि बातचीत का रास्ता पहले भी फेल हो चुका है, कोर्ट के हस्तक्षेप के बिना इसका फैसला मुमकिन नहीं है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी कोर्ट की सलाह को एक तरह से खारिज करते हुए कहा कि यह मालिकाना हक का मामला है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'कृपया याद कीजिए बाबरी मस्जिद मुद्दा मालिकाना हक का मामला है, जिसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गलती से भागीदारी मामला मानकर फैसला सुनाया था, इसीलिए सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गई है। केंद्र सरकार ने कोर्ट के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय का सुझाव स्वागत योग्य है। 

अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ है
अयोध्या में मंदिर मस्जिद के लिए मुकदमा लड़ते सवा सौ साल हो गया है।  इस एक मुद्दे ने बड़े बड़े नेता बना दिए। सरकारें बना दीं और सरकारें गिरा दीं। 
1853: हिंदुओं का आरोप कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ। इस मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई।
1859: ब्रिटिश सरकार ने तारों की एक बाड़ खड़ी करके विवादित भूमि के आंतरिक और बाहरी परिसर में मुस्लिमों और हिदुओं को अलग-अलग प्रार्थनाओं की इजाजत दे दी।
फैजाबाद की पुरानी इमारत सवा सौ साल पहले हुए मंदिर मस्जिद झगड़े के पहले मुकदमे की गवाह है। तब बाबरी मस्जिद के दरवाजे के पास बैरागियों ने एक चबूतरा बना रखा था। 
1885: में महंत रघुबर दास ने अदालत से मांग की कि चबूतरे पर मंदिर बनाने की इजाजत दी जाए। यह मांग खारिज हो गई। 
1946: में विवाद उठा कि बाबरी मस्जिद शियाओं की है या सुन्नीयों की।  फैसला हुआ कि बाबर सुन्नी की था इसलिए सुन्नीयों की मस्जिद है। 
1949: जुलाई में प्रदेश सरकार ने मस्जिद के बाहर राम चबूतरे पर राम मंदिर बनाने की कवायद शुरू की। लेकिन यह भी नाकाम रही। 1949 में ही 22-23 दिसंबर को मस्जिद में राम सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां रख दी गईं। 1949 : 29 दिसंबर को यह संपत्ति कुर्क कर ली और वहां रिसीवर बिठा दिया गया। 
1950: से इस जमीन के लिए अदालती लड़ाई का एक नया दौर शुरू होता है। इस तारीखी मुकदमे में जमीन के सारे दावेदार 1950 के बाद के हैं। 
1950 : 16 जनवरी को गोपाल दास विशारत अदालत गए. कहा कि मूर्तियां वहां से न हटें और पूजा बेरोकटोक हो। अदालत ने कहा कि मूर्तियां नहीं हटेंगी, लेकिन ताला बंद रहेगा और पूजा सिर्फ पुजारी करेगा। जनता बाहर से दर्शन करेगी। 
1959: निर्मोही अखाड़ा अदालत पहुंचा और वहां अपना दावा पेश किया। 
1961: सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अदालत पहुंचा।  मस्जिद का दावा पेश किया। 
1986: 1 फरवरी को फैजाबाद के जिला जज ने जन्मभूमि का ताला खुलवा के पूजा की इजाजत दे दी। 
1986 : कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाने का फैसला हुआ। 
1989: वीएचपी नेता देवकीनंदन अग्रवाल ने रामलला की तरफ से मंदिर के दावे का मुकदमा किया। 
1989: नवंबर में मस्जिद से थोड़ी दूर पर राम मंदिर का शिलान्यास किया गया। 25 सितंबर 1990 को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से एक रथ यात्रा शुरू की। इस यात्रा को अयोध्या तक जाना था। इस रथयात्रा से पूरे मुल्क में एक जुनून पैदा किया गया।  इसके नतीजे में गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भड़क गए। ढेरों इलाके कर्फ्यू की चपेट में आ गए। लेकिन आडवाणी को 23 अक्टूबर को बिहार में लालू यादव ने गिरफ्तार करवा लिया। 
1990 : कारसेवक मस्जिद के गुम्बद पर चढ़ गए और गुम्बद तोड़ा।  वहां भगवा फहराया।  इसके बाद दंगे भड़क गए।  
1991 : जून में आम, चुनाव हुए और यूपी में  बीजेपी की सरकार बन गई। 
1992 : 30-31 अक्टूबर को धर्म संसद में कारसेवा की घोषणा हुई। 
1992 : नवंबर में कल्याण सिंह ने अदालत में मस्जिद की हिफाजत करने का हलफनामा दिया। लेकिन 6 दिसंबर 1992 को लाखों कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिरा दी।  कारसेवक 11 बजकर 50 मिनट पर मस्जिद के गुम्बद पर चढ़े। करीब 4.30 बजे मस्जिद का तीसरा गुम्बद भी गिर गया। 
इस घटना के बाद मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जिन्होंने अदालत में हलफानामा देकर मस्जिद की हिफाजत की जिम्मेदारी ली थी, अपनी बात से पलट गए थे। उन्होंने इस पर फख्र जताया था। उन्होंने कहा था, अधिकारियों का कर्मचारियों का किसी रूप में कहीं कोई दोष नहींकसूर नहीं, सारी जिम्मेदारी मैं अपने ऊपर लेता हूं। इस्तीफा देता हूं। किसी कोर्ट में कोई केस चलना है तो मेरे खिलाफ करो। किसी कमीशन में कोई इन्क्वायरी होनी है तो मेरे खिलाफ करो। 
2003: हाईकोर्ट ने 2003 में झगड़े वाली जगह पर खुदाई करवाई ताकि पता चल सके कि क्या वहां पर कोई राम मंदिर था। 
2005: में यहां आतंकवादी हमला हुआ, लेकिन आतंकवादी वहां कुछ नुकसान नहीं कर सके और मारे गए। 
30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आदेश पारित कर अयोध्या में विवादित जमीन को राम लला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बांटने का फैसला किया।
2011: सुप्रीम कोर्ट नें हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया। 
21 मार्च 2017: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की है। चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने कहा है कि अगर दोनों पक्ष राजी हो तो वो कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी बातें स्पष्ट की है पर समाज और समाज का प्रतिनिधित्व करनेवाले लोगों यह बात शायद समज नहीं आ रही है या समझना नहीं चाहते की राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के लिए लड़ना बेकार है। राम मंदिर - बाबरी मस्जिद ने समाज का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। राम मंदिर-बाबरी मस्जिद ने सभी को एकदूसरे से दूर किया है। इसके बावजूद लोग खुद में सुधार लाने को तैयार नहीं है। तक़रीबन 90 फीसदी लोग यही कहते हैं की भगवान एक है तथा उनके अलग अलग नाम है जैसे की अल्लाह, गॉड इ। भगवान को माननेवाले लोग अगर यह कहते हैं की भगवान एक है फिर अयोध्या में राम मंदिर बने या बाबरी मस्जिद इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। 


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