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Rudra Trailer Out : अजय एक बार फिर कॉप लुक में

वेब सीरीज रुद्र द एज ऑफ डार्कनेस का ट्रेलर रिलीज(“Rudra - The Edge of Darkness"). इस वेब सीरीज से अजय देवगन (Ajay Devgn, Digital Debut) कर रहे हैं डिजिटल डेब्यू. रुद्र में अजय एक बार फिर कॉप लुक में नजर आ रहे हैं . अजय के अलावा में राशि खन्ना (Raashi Khanna), ईशा देओल (Esha Deol), अतुल कुलकर्णी, अश्विनी कालसेकर, तरुण गहलोत, आशीष विद्यार्थी और सत्यदीप मिश्रा प्रमुख भूमिकाओं में नज़र आएंगे. ‛रुद्र- द एज ऑफ डार्कनेस’ ब्रिटिश वेब सीरीज ‘लूथर’ की रीमेक है. ('Rudra - The Age of Darkness' is a remake of the British web series 'Luther'.)

क्या महिला पुरुष एक है ?



8 मार्च को महिलाओं के शक्ति का आदर करनेवाली बातें सुनकर सुकून मिलता है. ऐसा महसूस होता है हम समाज के तौर पर विकास कर चुके हैं. महिलाएं एक सुख, सुरक्षा के साथ जिंदगी जी रही हैं.

ऐसे में एक बात यह भी है कि आज अगर हमें महिला दिवस मनाने की आवश्यकता पड़ रही है तो यह निश्चित रूप से सोचने की बात है.

सभी लोग समाज के तौर पर बदलने का नाटक कर खुद को झूठे सपने के साथ जीने के लिए मजबूर कर रहे हैं. महिलाएं अभी भी सुरक्षित नहीं है क्योंकि कुछ बुद्धिजीवी (महिला कमजोर होती है विचार रखनेवाले) महिलाओं पर तंज कसते हैं, उनको दबाए रखना चाहते हैं. हजारों, लाखों वर्षों से महिलाओं के साथ गलत बर्ताव होता आया है. आजकल ट्रोल करनेवाले लोग ज्यादा दिखाई देते हैं. यह ट्रोल करनेवाले लोग सेलेब्रिटीज तथा आम लोगों को भी ट्रोल करने का मौका नहीं छोड़ते, भलेही कुछ अच्छा काम किया हो, लिखा हो. हां, एक और बात यह ट्रोल करनेवाले संस्कारी लोग संस्कार सिखाते हुए शब्दों की मर्यादाएं याद नहीं रखते. पुरुषों के मानसिकता को चुनौती देते हुए महिलाओं ने समानता की लड़ाई लड़कर खुद का स्थान स्थापित किया. महिलाओं के साथ गलत बर्ताव का एक उदाहरण होली के पहले भी देखने मिला जब दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट पर सीमन (वीर्य) भरे गुब्बारे फेंकने की घटना घटी. बहुत से आर्टिकल्स, प्रोग्राम्स में महिलाओं पर होनेवाले अत्याचार की जानकारी विस्तार से बताई जाती है.


महिलाओं के प्रति छोटी सोच रखनेवाले लोगों को, या महिला-पुरुष की तुलना करनेवाले लोगों एक बात समझनी चाहिए कि महिला पुरुष अलग अलग नहीं बल्कि एक शक्ति हैं. बचपन से ही लड़का लड़की की तुलना करने के बजाय साथ रहने की सीख देनी होगी. भले ही छोटी शुरुवात लगे पर खुद में यह बदलाव लाने से छोटी छोटी बातें बड़ा असर करेंगी.

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स्त्री को स्वतंत्रता का इंतज़ार

इस महिने और आनेवाले अनेक वर्षो तक भारत को कुछ बातें हमेशा याद रहेगी. उनकी चर्चा की जायेगी. यह बातें है राष्ट्रवाद (देशभक्ति) और स्त्री-पुरुष समानता की. देशभक्ति की तरह स्त्री-पुरुष समानता की बात अनेक वर्षो से हो रही है. 8 मार्च को पूरे दुनिया में स्त्री दिवस मनाया जाता है. इस दिन स्त्री शक्ति की बात की जाती है. स्त्री शक्ति के योगदान के लिए धन्यवाद दिया जाता है. इस दिन हर जगह अखबार से लेकर दूरदर्शन तक और आधुनिक समाज के लोकप्रिय माध्यम सोशल मीडिया तक इसे जोर शोर से मनाया जाता है. इस दिन स्त्री शक्ति के लिए ढेर सारे संदेश, कवितायें लिखी जाती है. 8 मार्च से पहले से ही सोशल मीडिया के माध्यम से अनेक संदेश, कवितायें एक दूसरे तक पहुंचाना (शेअर करना) शुरू हो जाता है. यह सब देखकर यही लगता है की नारी (स्त्री) शक्ति के महत्व को समाज बहुत महत्व देता है, उनका आदर करता है. पर असली बात यही शुरू होती है. समाज बस संदेश कवितायें शेअर करता है. समाज ने स्त्री शक्ति को आदर दिया है उसके महत्व को स्वीकार है यह बस कल्पनायें है, क्योंकि अगर समाजने स्त्री शक्ति को महत्व दिया होता, उसके प्रति आदर होता तो महि...